बातें बेवजह

दुखों पर ही अपना घर…

नीम के घने पेड़ों की छाँव थी. तीन मंज़िला होस्टल के तीन गलियारे थे. एक रास्ता था जो अख़बार के दफ़्तर जाता था, दूसरा रास्ता सेंट्रल लायब्रेरी. अख़बार के दफ़्तर जाते हुए एक दिन अच्छा लिख सकने की हसरत टांग कर साथ ले जाता और लेंग्वेजेज वाले डिपार्टमेंट की तरफ यानि घूम कर लायब्रेरी जाने वाले रास्ते में मुहब्बत हो जाने की उम्मीद साथ चलती थी. हमउम्र लड़कों से लड़कियां मुहब्बत नहीं करती कि उनके पास इंतज़ार करने के लिए वक़्त नहीं होता. इसलिए मेरे सारे फेरे नाकाम रहे.

एक और जगह थी. जहाँ कुछ कामरेड मिला करते थे. मैं भी वहाँ होता था मगर एक ख़राब कामरेड की तरह. उतना ही ख़राब जितना कि हल का मुड़ा हुआ फाल, जितना कि अच्छी कविता में आया एक विजातीय शब्द. समय का बादल बरसता रहता है मुसलसल, लोग बिछड़ते जाते हैं, फिर भी दिल में बसे रहते हैं सायकिलों पर चलते हुए लड़के. चलते चलते एक दिन हम जाने कहाँ पहुँच जाते हैं कि ज़िन्दगी कितनी अकल्पनीय होती है.

मनोज के दफ़्तर के बाहर लोग कहते हैं कि एसीपी साहब हम गरीब लोगों के आदमी है. मुझे सुनते हुए हर बार ख़ुशी होती है. जगह बदल जाने से काम और नीयत नहीं बदल जानी चाहिए. अब भी वे ही लोग दिल में धड़कते हैं. अब भी शामें अक्सर बुलाती है कि नुक्कड़ नाटक  के लिए पर्चे बांटो, किसी चाय की थड़ी पर आओ, किसी कॉफ़ी हाउस चलो. किसी दोस्त को कविता सुनाओ कि मनुष्य ने ईश्वर से बेहतरीन काम किये हैं.

पहाड़ों की ऊँची चोटियों पर चढ़ना 

देवताओं का अपमान था
ऐसा करने से टूट पड़ता था ईश्वर, कहर बन कर
छोटी आँखों वाले भोले लोगों पर
मगर कुछ शैतान पहुँच ही जाते चोटी तक और कहते हैं
कि धरती पर रहते हुए देखा जा सकता है इसे गोल गोल.

घने दरख्तों के बीच सदियों से हवा में बजती है
पांच हज़ार साल बूढ़े साधू की बात
कि सरे आम रखना ईश्वर को मंजूर न था.
इसलिए दुखों को छुपा कर रखा है इन मुश्किल पहाड़ों में
आदमी ने मगर कर लिया इन दुखों पर ही अपना घर.
* * *

[ तस्वीर : रोटियां बनाते हुए इन्सान, पेड़ों पर नहीं लगती हैं रोटियां ]
Advertisements

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s