बातें बेवजह

चल हट, ढाई ढूश…

29 फरवरी चार साल में एक बार तो आती है, वह तो कभी नहीं आता.

मुख़्तसर बातें करो बेजा वज़ाहत मत करो – डॉ. बशीर बद्र.
[ Muḵẖtaṣar – Abridged, curtailed, concise, small;  Waẓāḥat – to be clear, Clearness, purity.]

दिल टूट गया है

आओ
आधा आधा पिज्जा खाते हैं
थोड़ी सी सिंगल माल्ट पीते हैं
* * *

बेवजह की बातें
चल हट, ढाई ढूश ?
[ढाई ढूश – पारी समाप्त, खेल रद्द, सौदा ख़त्म ]

आई लव यू
माने ?
चल दारू पियेंगे और किसी को लात मारेंगे.
* * *

प्रेम कोई विलक्षण आदिम चीज़ नहीं है

यह अनवरत है
अभी खो गया है, कभी फिर मिल जायेगा.
* * *

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