गुडाळ, बातें बेवजह

वे फेदर टच अंगुलियाँ कैसी थी ?

मेरे एक मित्र हैं अर्जुन मूंढ़. वे अपनी टवेरा कार लेकर घर आये और मैं उनके साथ गाँव की ओर चल पड़ा. बड़े यारबाज आदमी है. पिछले साल एक दोपहर मुझे फोन करके कह रहे थे कि डिप्टी साहब के नंबर दो, फोन करना है. ये वाइन शॉप का सेल्समेन विस्की के सात रुपये अधिक ले रहा है और बिल नहीं देता. मैंने कहा भाई चिंतित न होओ, उपभोक्ता अदालत में बिल न हो तो भी सुनवाई होती है. वह सात रूपये अधिक लेता है तो कोई बात नहीं कल.  हम उस पर दावा कर देंगे. कार में बैठे हुए मैं उस घटना को याद करते हुए मुस्कुराता रहा.

शहर के बाहर निकलते ही उन्होंने कार को नेशनल हाइवे के साइड में लगाया और प्रतीक्षा करने लगे. थोड़ी ही देर में एक बाइक सवार आया और पांच बोतल विस्की दे गया. मेरी ओर देखते हुए कहने लगे बेगार है यानि किसी और का काम है. मेरी मंजिल कुछ और थी इसलिए वे बोतलें मेरी धड़कनों को बढ़ा न सकी. हम सफ़र के दौरान अपनी ज़मीन की बात करते रहे. वे मुझे समझाते रहे कि एक किसान को अपनी ज़मीन की क़द्र करनी चाहिए. मैंने क्षमा मांग ली कि मुझे अपनी नहरी ज़मीन पर जाने का समय नहीं मिल पाता है. इस रास्ते में बीस किलोमीटर पर हम दोनों के एक बेहद करीबी दोस्त का घर आ गया. वहां वे उतरे, कार की चाबी दोस्त को दी और पाँचों बोतल लेकर चले गए.

मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि कुछ फोन शोरगुल से भरी जगहों पर आया करते हैं. वहीं भरी गुडाळ में सेल बजने लगा. आवाज़ आई और खो गई जैसे कमसिन मुहब्बतें पलक झपकते टूट कर सीने में उम्र भर के लिए चुभ जाया करती है. मैं इस भरी भीड़ में आवाज़ के सम्मोहन में खो गया तो बाहर धूप में निकल आया. मैंने सोचा कि कोई अचानक बाद बरसों के क्यों याद करता होगा. आस-पास के गांवों की औरतें अपने बच्चों के साथ जमा थी. पुरुष गोल घेरों में बैठे हुए पोस्त के चूरे को भिगो कर छान रहे थे. मेरे पास भी परिचित लोगों का घेरा बन गया. उनमे बहुत से बच्चे थे. वे जानना चाहते थे कि गाँव तक एफ एम कब तक सुनाई देगा.

मेरे अपने गाँव से दस किलोमीटर आगे के गाँव में दोस्त का ये घर शोक से भरा था. उसके पिता के निधन के बाद कल का दिन शोक के समापन और अटूट स्मृतियों के आरम्भ होने का दिन था. वैसे एक दिन सब खो जाएंगे. उनके पांवों के निशानों को जेठ की आंधियां उड़ा ले जाएगी. हमारे अपने प्रिय जिनकी छाँव में हम बड़े हुए, कंधों पर खेले हैं, एक दिन उनकी पार्थिव देह को अग्नि को समर्पित कर आना है. मैं ऐसे अनुभवों से गुजरते हुए ही प्रेम को सबसे करीब पाता हूँ. अपने दोस्तों से कहता हूँ तुम खुल कर ढेर सारा प्रेम करो. अपने बच्चों को सीने से लगाओ, माँ के पास चिपक कर बैठो, पिता से कहो कि आप बहुत अच्छे हो और मैं दुनिया में सबसे अधिक आपसे प्रेम करता हूँ. ढलती उम्र में सुन्दरतम होते जाते जीवन साथी को हमराह होने के लिए शुक्रिया कहो.

मुझे यकीन है हम खोयी हुई आवाजें बार बार सुन सकेंगे. सिर्फ आवाज़ ही क्यों कभी न कभी हम देख सकें बिछड़ी हुई आँखों को. मैंने पहले जो बेवजह और बहुत सी बातें लिखी थी, उसमें कमसिन उम्र की मुहब्बत की एक बात ये भी थी.

सूखी निब को कांपते होठों से गीली करके
जो नाम कापियों पर लिखा था, वो नाम किसका था. …

झमक सी ठंडी रातों और चूर्ण से खट्टे दिनों में
ज्योमेट्री में बिछे कागज के नीचे क्या धड़कता था ?
जिस नर्म दोशीज़ा छुअन के अहसास से जागा करते थे,
वे फेदर टच अंगुलियाँ कैसी थी ?

ज़िन्दगी गुल्लक सी होती तो कितना अच्छा होता
सिक्के डालने की जगह पर आँख रखते
और स्मृतियों के उलझे धागों से बीते दिनों को रफू कर लेते.

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