कहानी, बातें बेवजह

फिर शाम आएगी, वो फिर याद आएगा

हमें अपने पास बहुत सा स्पेस रखना चाहिए. ज़िन्दगी में, दिमाग में और दिल में भी क्योंकि भरी हुई जगहें अक्सर बोझ बन जाया करती है. मैंने जब काज़िमीर मलेविच का नाम सुना तो खास अचरज नहीं हुआ था. रूसी लोगों के नाम ऐसे ही होते हैं. मुझे ये जान कर बेहद आश्चर्य हुआ था कि वे एक काले रंग की स्क्वायर और सफ़ेद पर सफ़ेद रंग की पेंटिंग बनाने के लिए जाने जाते हैं. इसी तरह डेविड स्मिथ की अमूर्त शिल्प कला और हैरत में डाल देती है. काले रंग का स्क्वायर बनाना भला कोई अविस्मरणीय काम हो सकता है ? या फिर एक ऐसा शिल्प जिसमें डेविड एक स्क्वायर पर एक क्रोस खड़ा करते हैं फिर उस पर एक स्क्वायर रखते हैं फिर उससे एक आयत चिपक जाता है… मेरे लिए ये सब अबूझ है, अविवेचनीय हैं.

ऐसी ही अमूर्त और अनगढ़ ज़िन्दगी हम सब जीते हैं. मैं पिछले कई सप्ताह से कुछ कहानियों के ड्राफ्ट लिख लेना चाहता हूँ लेकिन दिन बहुत छोटे हो गए हैं और नयी खुशबुओं ने अपनी पांखें फैला रखी है. सांझ के धूसर नग्में, रात के तन्हा बिछोडे़ मुझे अपने पहलू में छिपा लेते हैं. इन दिनों शराब की उम्दा क्वालिटी है, मौसम में ठण्ड भी है और दिन में चमकती हुई धूप भी है. सोचता हूँ कि बीज (स्त्री-पुरुष) ने ज़मीन (कोख) से बाहर सबसे पहले अपना सर उठाया होगा फिर उसने साँस ली होगी और अपने पांवों में हौसला भर कर पानी की खोज में निकल गया होगा. इसी तरह निश्चिन्तता से जीवन को पूर्णता की ओर ले जाते देख कर बीज के रचयिता की ऊब बढ़ गयी होगी. फिर उसने प्रेम जैसी शय का आविष्कार करके बीज को उपहार में दिया होगा ताकि वह सिर्फ पानी (शराब) जैसी मामूली चीजों को आसानी से पा लेने की जगह प्रेम जैसी कठिन चीज के पीछे भागता फिरे.

दरख्तों के पार ज़मी को चूमता
आंख से छिटकता है शाम का आखिरी लम्हा
स्याह दर्द का रंग घुल जाता है क्षितिज के पार.

सोचता हूं उन गुलाबी हथेलियों पर भी
रेशमी अवसाद की सुनहरी तितलियां
दम तोड़ती होंगी.

इतना तय पाता हूँ कि
सफ़र की झोली कुछ और हल्की हो जाती है,
गहरी सांस लेता हुआ, कोई दुआ देता हुआ
एक और दिन चौखट से उठ ही जाता है.

रात की चुप्पी में अंगुलियां
स्मृति की सलवटों को करीने से रखने लगती है
तो रूह यकायक चौंक उठती है, जैसे तूने छू लिया है
और इस तरह कुछ भी जाया नहीं होता.

बातें बेवजह हैं और बहुत सी हैं

* * *

दोस्त तुम जब आओ तो सात समंदर पार से अपने हिस्से की रातों के कुछ लम्हे चुरा लाना. हम उन्हें पनियल ख़ुशी से भिगो कर गर्म सांसों से सुखायेंगे फिर उन पर अभ्रक का नूर उभर आएगा. वे तुम्हारे लौट जाने के बाद भी मेरी याद में चमका करेंगे. मैंने तुम्हारे लिए भी एक तोहफा सोच रखा है कि तुम्हारी पलकों पर अज़रक प्रिंट बहुत फबेगी.

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