बेगम अख्तर, सुदर्शन फ़ाकिर, सूरतगढ़

दिल तो रोता रहे और आँख से आंसू ना बहें

कहां कर रहे हो, कहां जा रहा है
किये जाओ राजा मजा आ रहा है

हम अपनी तमीज भूल चुके थे. ये जाने किसने कहा था, किसकी महफ़िल थी और जाने किसने सुना था. शराब का नशा और खिलने लगा. सोने जैसी रेत पर काली कलूटी सड़क, महान व्यक्ति के चरित्र पर काले कारनामों की रेख. इसी सड़क के किनारे रोटी के ढाबों का सिलसिला. बिछी हुई चारपाइयों पर चड्ढा ग़ज़ल गुनगुनाते हैं. दाल में बघार की खुशबू और मिट्टी पर गिरे हुए डीज़ल की मिली जुली गंध में रम के ग्लास की पहचान नहीं हो पाती. करमजीत पी नहीं रहा, चिंतित हो रहा है. कुछ लोग शराब के इस तरफ होते हैं कुछ उस तरफ.
वो सूरतगढ़ अब दस साल पीछे छूट गया है.

* * *

बेतरतीब कटे हुए प्याज, दो सिकी हुई हरी मिर्च, टमाटर सॉस और ग्रीन लेबल विस्की. एक आँगन, एक कमरा, एक फोटो फ्रेम में मुस्काती हुई लड़की. इसने शायद देखा होगा कि आज रेणु इस कमरे में आई थी लेकिन शुक्र है कि तस्वीरें चुप रहना पसंद करती है. ठंडी रात, ठंडी रजाई और चित्रा के पहलू से आती हुई जगजीत सिंह की आवाज़. कभी सप्ताह भर शकील साहब के बोल बजते बेगम साहिबा की आवाज़ में, मेरे हमनफस मेरे हमनवा… महीने की तनख्वाह ढाई हज़ार और खर्च… खर्च तो उम्र हुई जा रही थी मगर उसकी स्मृतियाँ कभी खर्च नहीं हो पाई. वे दिनों दिन संवरती गयी. अब कई बार लगता है वो एक ख़्वाब था, जिसे भूल न सका.

पास में एक घर था. बहुत अपना और बहुत पराया. वो घर जिस शहर में था, उसे चूरू कहते हैं. सत्रह साल पीछे छूट गया है.


* * *

बाहर का रास्ता दीवार के ऊपर से विश्वविध्यालय के आगे से गुजरते हुए नॅशनल हाई वे के पार चाय की थड़ी तक जाता है. एक बारहठ जी, भगत की कोठी रेलवे स्टेशन के बाहर चाय बनाते हैं. रात के दो बजे शराब बची नहीं, चलो चाय पीते हैं.बारहठ जी कहते “चारणों क्यों रो रो नैण गंवाओ, राठोड़ी म्हारी गयी अब खेती खड़ ने खाओ…”
जोधपुर विश्व विद्यालय के न्यू केम्पस के पी जी हास्टल का कमरा संख्या तीन सौ सात, बीस साल पीछे छूट गया है.

* * *

कल दूसरे गेम में स्मेश करते समय लगा कि बाल को स्पोट नहीं कर पाया कि शामें जल्दी घिरने लगी है. रेगिस्तान में शाम रात आठ बजे से सरक कर अब छः बजे तक आने वाली हैं. अब फ्लड लाईट की रौशनी में खेलना होगा. साल भर पहले इसी जगह ऐसे ही स्मेश करते हुए बाएं घुटने के लिगामेंट्स को बरबाद कर लिया था. अब फिर से वालीबाल … अगले सप्ताह माथुर हाई पावर ट्रांस मीटर चले जाएंगे. गेम सुस्त हो जायेगा. उन्होंने कहा ‘आज आपके साथ पीनी है’. मैंने कहा कल ठीक रहेगा. कल क्यों ?
बेग़म अख्तर साहिबा का हेप्पी बर्थडे है दोस्त… हेप्पी बर्थडे !
दोस्त, प्रेमिकाएं और शराबी… सब पीछे छूटते जाएंगे.

मल्लिका-ए-ग़ज़ल अख्तरी बाई फैज़ाबादी, आप हमेशा साथ रहेंगी.
कुछ तो … शाईर – सुदर्शन फ़ाकिर, आवाज़ – बेगम अख्तर
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