बातें बेवजह

छोटी नीली चिड़िया को
चाहिए होती है जितनी जगह
एक पतली सी टहनी पर।

सबको
बस उतना सा प्यार चाहिए होता है।
* * *

तुमसे जो भी मिला
वह चाहना से ज्यादा निकला।

मिलने की बेचैनी बहुत गहरी रही
तुमसे बिछड़कर आंसू टूटकर बहे।
* * *

सायकिल के कॅरियर पर बैठे
उनींदे बच्चे के पांव से गिरे
कच्चे हरे नीले रंग के जूते की तरह।

अक्सर कहीं पीछे छूट जाता है, प्रेम।
* * *

ठेलों पर पड़े
पुराने कपड़ों की तरह
पुराना प्रेम
बचा रहा स्मृति के खटोले पर।
* * *

समय रुक नहीं जाता था
घड़ी के बंद हो जाने पर
इसलिए साथ चलने को
हम चाबी भरते रहे।

रुक गए प्रेम को
आगे बढ़ाने की जुगत न मिली।
* * *

पंछी उड़कर
फिर लौट आता है घोंसले पर।

कभी अचानक
हमेशा के लिए नहीं भी आता।

प्रेम का जाने क्या होता है।
* * *

धूप में पड़ी कुर्सी
एक दिन मर गयी।

दिल मे छुपाकर रखा प्रेम भी नहीं बचा।
* * *

एक धुंधलके में धोखे को देखा. उसे देखते ही अनेक बातें आस पास घूमने लगीं.

धोखा लगातार
प्रेम की टोह में रहता है।

पहले अंदेशे में
जो भाग नहीं पाते उनको
धोखा अपनी बाहों में भर लेता है।
* * *

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धोखे के पास हर रंग होता है
वह घास में घास सा
छांव में छांव सा दिखता है।

प्रेम को रंग बदलना नहीं आता
इसलिए अक्सर मारा जाता है।
* * *

धोखे की पूंछ लम्बी होती है
उसे सम्भलना होता है हर दांव में।

प्रेम की पूंछ बहुत छोटी होती है
प्रेम को दांव नहीं खेलना होता है।
* * *

धोखा देख सकता है
बेहद कम रोशनी में।

प्रेम कभी नहीं देखता, कुछ भी।
* * *

धोखा चुनता है
रास्ते और सही अवसर।

प्रेम खोया रहता है, जाने किस ख़याल में।
* * *

प्रेम का
मौसम आता है।

धोखा सदाबहार है।
* * *

हज़ार धोखे हैं।

प्रेम लाख है
ताकि चलता रहे कारोबार।
* * *

 

ये छोटी कविताएँ कहीं नहीं छपी हैं. इनको लेकर अक्सर दुविधा रहती है कि कुछ शब्दों की दो चार छोटी पंक्तियों के लिए कागज़ का पूरा पन्ना क्यों बरबाद किया जाये.

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