कहानी संग्रह

पहले पहल अच्छा लगा था कि कहानी संग्रह छपकर आया है. उसके बारे में पत्रिकाओं में लिखा जा रहा है. पाठकों, मित्रो और परिजनो ने कहानी संग्रह के बारे में यहाँ-वहाँ छप रही बातें भेजीं उन्हीं दिनों की कुछ एक कतरनें बची रह गयी. हिंदी किताबों में चौराहे पर सीढियाँ पहला कहानी संग्रह था जिसकी प्री बुकिंग की गयी. अमेज़न, फ्लिप्कार्ट और इन्फिबीम पर बिकने लगा और पचास दिन में पहला संस्करण बिक गया. इसके बाद ये एडिट हुआ फिर रिप्रिंट हुआ. ये लगातार छप रहा है.
दो और कहानी संग्रह आये. हिन्दयुग्म ने तीन बरस में तीन कहानी संग्रह छाप कर पाठकों को उपलब्ध करवाए. ये कहानी संग्रह लोक्रप्रिय हुए तो किशोर चौधरी को भी लोग जानने लगे. इन संग्रहों में शामिल की गयी कहानियां प्रेम, बिछोह, टूटन, जिजीविषा और दर्शन की कहानियां हैं. रेगिस्तान के जीवन, सौन्दर्य, भूगोल और विषमता को उकेरने के लिए बिम्ब के माध्यम से बात कहना मुझे अच्छा लगता है. इसलिए भी अनेकानेक स्थानों पर कहानियों की भाषा कविता सी जान पड़ती है.
अमेज़न और अन्य ऑनलाइन स्टोर्स पर इन कहानी संग्रहों को खोजा और मंगवाया जा सकता है. लेखक को कुछ कहना चाहते हैं तो कोंटेक्ट में अपनी बात लिख दें या फिर इस मेल पते पर बात कह दें.
yourkc@yahoo.com
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These stories comprise a world revolving around the relationship between man and woman. What keeps the reader glued to the stories is the writer’s way of rendering the ‘normal’ day-to-day incidents with unconventional metaphors and images, leaving the reader overwhelmed. The characters and situations evolving out of these incidents, however, do not turn these stories into mere escapist fantasies, but pull the reader towards themselves, painting a live picture of all the characters—creating a sense of déjà-vu.
The stories do not seek perfection in human lives by passing judgments of any kind, but encompass the complexity of the minutest of human emotions, weaving a melancholic but realistic face of life. The protagonists, often caught in a web of life—in the strands of love, lust and emotions, keep going to-and-fro, tossing like a boat on the waves of their physical and sentimental world.
The stories run in a style which is poetic in narration, carrying the knowledge that rises after experiencing the adversities of life. This not only compels the reader to read the stories uninterrupted on his computer’s screen, but also hold the writer accountable for hypnotizing him with his words.

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अहा जिंदगी

नई किताब

सच की कहानियाँ

कहानी संग्रह चौराहे पर सीढ़ियाँ वर्ष 2012 की बेहतरीन किताबों की सूची में शामिल है। अपनी पहली ही किताब से नया कीर्तिमान स्थापित करने वाले किशोर चौधरी के इस संग्रह में चौदह कहानियाँ हैं। सभी में शुरू से अंत तक बांधे रखने का भरपूर सामर्थ्य है। हर कहानी का अपना रंग है। जो बहुत गहरे तक आपने मन पर अपनी छाप छोड़ जाता है क्योंकि कहानियाँ आपके आस पास की और अपनी सी लगती हैं। इन कहानियों की सबसे बड़ी खूबी है भाषा और शैली। किशोर चौधरी बहुत ही सरल शब्दों में नायक या नायिका के भावों को इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि हर पात्र से हमें खुद को जुड़ा होने का का अहसास होता है। हर कहानी अपने आप में एक स्वतंत्र लोक है।…  हर कहानी कभी कविता सी बहती नज़र आती है तो कभी अपना अलग शब्द संसार गढ़ती नज़र आती है। सूक्ष्म से सूक्ष्म अनुभूतियों को इनमें मार्मिक अभिव्यक्ति मिली है। भिन्न भिन्न सामाजिक स्तर के प्रसंगों और अनुभवों से बुनी गयी यह कहानियाँ जीवन का एक अद्भुत कसीदा जड़ती है। इन में घर परिवार के जीवन को यथार्थ के साथ अंकित किया गया है। इन कहानियों को पढ़ने के बाद बार बार पढ़ने को जी चाहेगा। कहानियों के जाने कितने अंश दिल में समेट लेने की लालसा जगेगी। किताब की अधिकांश कहानियों में कभी आप अपने आपको देखनेगे कभी अपने कभी अपने जाने पहचाने चेहरों को। इन कहानियों की बुनावट और अंत भी सहज, लेकिन अप्रत्याशित होता है कुल मिलकर इस संग्रह के बारे में यह कहा जा सकता है कि इसकी सभी कहानियाँ आनंद देने वाली हैं।
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दैनिक जागरण

साप्ताहिक पुनर्नवा
पुस्तक चर्चा – आभासी जगत की कमसिन प्रेम कहानियाँ

किशोर चौधरी आभासी जगत के कथाकार हैं। किसी भी पत्र पत्रिका में कभी भी इनकी कहानियाँ नहीं छपी परंतु इनकी चौदह कहानियों का संकलन “चौराहे पर सीढ़ियाँ” आश्चर्यजनक ताज़गी और सौंदर्यबोध से पाठक को मोहविष्ठ कर लेता है। नितांत खुरदरे यथार्थ से टकरा कर लहूलुहान होती संवेदनाओं के ताने बाने से रची गई प्रेम कथाएँ जैसे मन में रूमानियत का मीठा अमल घोल देती है। इन कहानियों में भाषा संबंधी अद्भुत प्रयोग दृष्टव्य है जैसे “रात पखावज सी बज रही थी” या “सूखे पुदीने जैसी स्मृतियाँ थी। जिंदगी की चाक स्नेहा के स्पर्श से और भी गीली हो गयी थी।”

यदि आप किशोरवय की कलुष से अछूती, भोली भाली प्रणय अनुभूतियों में डूब जाना चाहते हों तो ये किताब अवश्य पढ़ें। निराश नहीं करेगी।

[राजेंद्र राव]

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छोरी कमली

रेगिस्तान में रहने वाले घुमक्कड़ लोगों की जीवन शैली, लोकगायन से जुड़ी जातियों का समाज में स्थान और जटिल सामाजिक तानेबाने में उपजे विजातीय प्रेम की गहरी टीस भरी कहानी है, छोरी कमली। इस कहानी में मांगणियार लोकगायक और घुमक्कड़ जोगी लड़की का प्रेम मेरुदंड है और उसके आस-पास रेगिस्तान का जीवन और रेत का बारीक सौंदर्य उकेरा हुआ है। लोकप्रिय कहानीकार किशोर चौधरी की यह कहानी, उनके दूसरे कहानी-संग्रह ‘धूप के आईने में’ प्रकाशित की गई थी। कहानी ‘छोरी कमली’ में उकेरे गए रेगिस्तान को पाठकों ने ख़ूब पसंद किया। कालबेलिया नर्तकी कमली के नाच और मांगणियार गायक के सुरों के प्रेम में आलोड़ित हो जाने वाले पाठकों और रेगिस्तान के चाहने वालों के लिए यह कहानी-संग्रह ‘छोरी कमली’ शीर्षक के साथ पुनः प्रस्तुत है।

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जादू भरी लड़की 

ये नौ कहानियों का संकलन है। शीर्षक कहानी एक लड़की के अटूट धैर्य और सादगी का बयान है। जीवन के कठोर पठार पर जीते जाना ही असल में लड़की का जादू से भरा होना है। किशोर चौधरी की कहानियों की भाषा शालीनता से भरी होती है और जीवन की विद्रूपता को सरल बिंबों के माध्यम से कहना इनकी कहानियों की विशेषता है। इन कहानियों का कथ्य अवास्तविक जीवन और कल्पना की उड़ान नहीं भरता है। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ स्त्री केन्द्रित न होते हुए भी उनके आस पास के दुरूह जीवन को चित्रित करती हैं। इन कहानियों में सरल प्रेम का जटिल पक्ष मुखरित है। इस संग्रह में शामिल नौ कहानियाँ अपने-आप से अलग हैं। ये कहानियाँ महानगरीय जीवन के अकेलेपन से लेकर कस्बाई तन्हाई को चित्रित करती हुई हैं। इन कहानियों को पढ़ते हुए पाठक अपने संसार और अतीत से खुद को जोड़ पाता है, ऐसा लगता है कि कहानीकार की जगह पाठक खुद को पढ़ रहा है।

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